संसद में रोहिंग्याओं को नागरिकता देने की मांग की गई है। लेकिन देश में अवैध रूप बढ़ रही राेहिंग्या मुस्लिमाें की आबादी भविष्य में सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हाे सकती है। यह आशंका सुरक्षा एजेंसियां जताती रही हैं।
गृह मंत्रालय के आंकड़ाें के मुताबिक देश में करीब 40 हजार राेहिंग्या अवैध रूप से रह रहे हैं। इनमें से 10 हजार से ज्यादा राेहिंग्या जम्मू-कश्मीर के जम्मू, सांबा, कठुआ, राजाैरी, डाेडा, पुंछ और अनंतनाग जिलाें में हैं। जनवरी 2017 में जम्मू-कश्मीर की तत्कालीन सीएम महबूबा मुफ्ती ने विधानसभा में बताया था कि 5,700 से ज्यादा रोहिंग्या राज्य में हैं। 2018 काे विधानसभा में दी गई एक रिपाेर्ट के अनुसार राज्य में 39 स्थानाें पर 6,523 राेहिंग्या हैं। यानी एक साल में ही अवैध रूप से आए राेहिंग्याओं की आबादी करीब 1 हजार बढ़ गई। गृह मंत्रालय के अनुसार जम्मू में 6,461 और कश्मीर में 62 राेहिंग्या रह रहे हैं।
राेहिंग्याओं से खतरा क्याें?
- अवैध रूप से रह रहे राेहिंग्याओं का बाॅयाेमैट्रिक रिकाॅर्ड सुरक्षा एजेंसियाें के पास नहीं है।
- 400 से ज्यादा राेहिंग्याओं के पास यूएनएचसीआर का शरणार्थी कार्ड भी नहीं है।
- सुंजवां आर्मी कैंप से सटकर राेहिंग्याओं के 48 परिवार बस गए हैं। इनमें 206 लाेग रह रहे हैं।
- जम्मू के चन्नी हिम्मत इलाके में पुलिस लाइंस के पास 50 राेहिंग्या परिवार के 743 लाेग शेड में हैं।
- नग्राेता में सेना के 16 काॅर्प्स हेडक्वार्टर के पास 40 राेहिंग्याओं की बस्ती है।
- दक्षिण कश्मीर में अक्टूबर 2015 में मुठभेड़ में दाे विदेशी आतंकी मारे गए थे, इनमें से एक म्यांमार मूल का था।
राेहिंग्याओं काे लेकर उठाए गए कदम
- जम्मू-कश्मीर पुलिस एक-एक व्यक्ति का रिकाॅर्ड तैयार कर रही है, इसका विराेध भी हो रहा है।
- केंद्र सरकार के निर्देश पर अनिवार्य तौर पर बाॅयाेमैट्रिक दस्तावेज बनवाए जा रहे हैं।